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लेखनी प्रतियोगिता -24-Feb-2023 संगठन

 बार बार कोशिश की,सबको संगठन में रखने की,
हर एक प्रयास किया,एक दुसरे को समझाने का।

लेकिन तब सुहानी सी लगी,जिद अलग रहने की,
अपनो को ही त्याग कर,अपना आशियां बनाने की।

फूलों के गुलदस्ते में से,केवल एक फूल उगाने की,
बंधी हुई एक झाडू में से,एक तिनका निकालने की।

बहुत विशाल पहाड़ में से,एक छोटा पत्थर बनने की।
सदाबहार वन के पेड़ को बंजर जमीन पर उगाने की।


फिर हुआ क्यों ऐसा फिरसे,कि संगठन की चाहत हुई,
फिर निकले क्यों आँसू आँख से,जब खुद पर आन पड़ी।

फिर हुआ क्यों नद मस्तक,जब अपनों की आहट हुई।
फिर क्यों देख फौज अपनों की,दिल ने राहत की साँस ली।
@खुशबू नरोलिया 


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7 Comments

Alka jain

01-Mar-2023 06:59 PM

Nice 👍🏼

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बहुत सुंदर 👌👌

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Khushboo Naroliya

24-Feb-2023 06:02 PM

धन्यवाद आदरणीया🙏🙏🙏

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बहुत खूब

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Khushboo Naroliya

24-Feb-2023 03:06 PM

धन्यवाद सर🙏🙏

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